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मुख्यधारा की ओर बढ़ते कदमः चौगेल पुनर्वास केंद्र में आत्मसमर्पित नक्सलियों ने हर्बल गुलाल निर्माण से लिखी कहानी

by Bhupendra Sahu

उत्तर बस्तर कांकेर  । जीवन में सकारात्मकता और सृजनात्मकता से दूरगामी परिणाम मिलते हैं। कभी हिंसा की राह पर चलने वाले आत्मसमर्पित माओवादी अब नवाचार की ओर आगे बढ़ रहे हैं तथा विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रशिक्षण लेकर अपने भीतर छिपी प्रतिभा को निखार रहे हैं। भानुप्रतापपुर विकासखण्ड मुख्यालय से लगे ग्राम चौगेल (मुल्ला) स्थित पुनर्वास केंद्र आज सकारात्मक परिवर्तन और आत्मनिर्भरता का प्रेरक उदाहरण बनकर सामने आया है। यहां पुनर्वासित आत्मसमर्पित माओवादियों द्वारा प्राकृतिक और हर्बल गुलाल का निर्माण किया जा रहा है, जो उनके जीवन में नई आशा और सम्मान का संचार कर रहा है।

एक समय मुख्यधारा से भटके ये युवा अब शासन की पुनर्वास नीति और जिला प्रशासन के सहयोग से जुड़ चुके हैं। इसके तहत उन्हें विभिन्न स्वरोजगारमूलक गतिविधियों का प्रशिक्षण दिया गया, जिनमें से एक हर्बल उत्पाद निर्माण विशेष रूप से शामिल है। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पलाश के फूल, मेंहदी, हल्दी, सिंदूर बीज, चुकंदर एवं अन्य प्राकृतिक वन उत्पादों से रसायनमुक्त और त्वचा के लिए सुरक्षित गुलाल तैयार किया जा रहा है।

इस पहल का उद्देश्य केवल रोजगार उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और सामाजिक स्वीकृति को भी बढ़ाना है। होली पर्व पर इस हर्बल गुलाल की मांग निरंतर हो रही है, जिससे जुड़े लोगों की आय में इजाफा हुआ है और वे आर्थिक रूप से सशक्त बन रहे हैं। पुनर्वास कैम्प में हर्बल गुलाल उत्पाद का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहीं आत्मसमर्पित माओवादी मानकी नेताम, सामको नुरूटी, उंगी कोर्राम, डाली सलाम, गेंजो हुपेंडी कु. काजल वेड़दा ने बताया कि यह काम उन्हें बेहद रूचिकर और अच्छा लग रहा है। होली त्यौहार के मद्देनजर हर्बल गुलाल की अधिक मांग है, इससे बेहतर आय होगी।
इस तरह चौगेल पुनर्वास केंद्र की उक्त पहल इस बात का प्रमाण है कि बेहतर अवसर, मार्गदर्शन और आत्मविश्वास से व्यक्ति अपने जीवन की दशा और दिशा में आमूल-चूल परिवर्तन ला सकता है। हिंसा का रास्ता छोड़कर शांति, विकास और आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते ये कदम समाज के लिए प्रेरणा बन रहे हैं। यहां बन रहा हर्बल गुलाल केवल रंग नहीं, बल्कि नई शुरुआत, विश्वास और सम्मान की पहचान बन चुका है।

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