भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने कहा है कि उज्जैन ने सदियों से धर्म, ज्ञान, विज्ञान और संस्कृति की ज्योति प्रज्ज्वलित की है। विरासत से विकास के इस प्रतीक के रूप मे ही उज्जैन में विक्रमोत्सव का सांस्कृतिक महापर्व आयोजित किया जा रहा है। यह केवल एक उत्सव नहीं बल्कि सांस्कृतिक अस्मिता और ऐतिहासिक स्वाभिमान का विराट पर्व है। महान सम्राट विक्रमादित्य ने न्याय, सुशासन और लोक कल्याण की ऐसी परंपरा स्थापित की जो आज भी हमारे लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनका शासन काल विद्या, विज्ञान, ज्योतिष और साहित्य के स्वर्णिम युग के रूप में विश्व में विख्यात रहा है। विक्रम संवत और भारतीय काल गणना हमारे वैज्ञानिक सोच और सांस्कृतिक समृद्धि का गौरवशाली प्रतीक है। उज्जैन का सांस्कृतिक आध्यात्मिक और सामाजिक आयोजन – विक्रमोत्सव हमारी परंपरा को नई ऊर्जा देगा। प्रदेश भर में गांव, शहर, कस्बों तक विक्रमोत्सव का विस्तार करते हुए प्रदेश में हो रहे सभी शिवरात्रि मेलों को इस आयोजन से जोड़ा गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शिव और शक्ति के महापर्व महाशिवरात्रि की उज्जैनवासियों को बधाई दी और रविवार को उज्जैन में विक्रमोत्सव-2026 का शुभारंभ कर यह विचार व्यक्त किये।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य के सुशासन की कीर्ति का वैभव संपूर्ण विश्व में छाया था। सम्राट विक्रमादित्य का दरबार नवरत्नों से संपन्न था। उन्होंने शकों को परास्त किया और तुर्कमेनिस्तान से आगे यूरोप तक सनातन संस्कृति का विस्तार किया। साथ ही विक्रम संवत के माध्यम से सुशासन की नई मिसाल स्थापित की। सम्राट विक्रमादित्य की गौरवगाथा का वर्णन चीनी यात्रा व्हेन सांग और अरबी इतिहासकार अलबरूनी के उल्लेखों में मिलता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सम्राट विक्रमादित्य की गौरवशाली स्मृति को अक्षुण्ण बनाए रखने और उनके शौर्य, न्याय तथा प्रजावत्सल आदर्शों को अमर बनाने के लिए उनकी स्मृति में एक करोड़ एक लाख रुपए का सम्राट विक्रमादित्य अंतर्राष्टीय अलंकरण सम्मान स्थापित करने की घोषणा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह देश का सबसे प्रतिष्ठित अलंकरण भारत की सांस्कृतिक गरिमा को विश्व मंच पर नई ऊंचाइयां प्रदान करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 21 लाख रुपए का राष्ट्रीय सम्मान और 5-5 लाख रुपए की तीन राज्य स्तरीय सम्मान भी स्थापित करने की घोषणा की।