एमसीबी किसान की मेहनत तब ही सार्थक होती है, जब उसके खेतों तक समय पर पानी पहुंच सके। एमसीबी जिले के जनपद पंचायत भरतपुर अंतर्गत वनांचल ग्राम पंचायत भगवानपुर के किसानों के लिए यह सपना लंबे समय तक अधूरा रहा। वर्षा पर निर्भर खेती, जल की लगातार कमी और सीमित संसाधनों के कारण यहां के वनवासी किसान अपनी मेहनत का पूरा लाभ नहीं उठा पाते थे। ऐसे हालात में महात्मा गांधी नरेगा योजना के अंतर्गत निर्मित अर्दन चेकडेम उनके जीवन में बदलाव की नई कहानी लिख रहा है।
जल संकट से जूझता गांव
भगवानपुर गांव के किसानों के अनुसार पहले यहां जल संचयन का कोई स्थायी साधन नहीं था। बरसात का पानी बिना उपयोग के बह जाता था और गर्मियों में पीने एवं घरेलू आवश्यकताओं के लिए भी भारी संघर्ष करना पड़ता था। सिंचाई सुविधा के अभाव में किसान केवल पारंपरिक धान की खेती तक सीमित थे, वह भी पूरी तरह वर्षा पर निर्भर रहती थी। कई बार अल्प वर्षा के कारण फसल नष्ट हो जाती थी, जिससे किसानों की मेहनत के साथ-साथ खेती में लगाई गई पूंजी भी डूब जाती थी।
अर्दन चेकडेम से बदली तस्वीर
स्थानीय किसानों की मांग और आवश्यकता को देखते हुए ग्राम पंचायत द्वारा महात्मा गांधी नरेगा योजना के अंतर्गत अर्दन चेक डेम निर्माण का प्रस्ताव पारित किया गया। लगभग 4 लाख 10 हजार रुपये की लागत से ग्राम पंचायत को ही एजेंसी बनाकर यह कार्य कराया गया। निर्माण कार्य समय पर पूर्ण किया गया तथा कटाव रोकने के लिए किनारों पर पत्थरों की पिचिंग कराई गई। इस चेक डेम से अब 8 हजार घन मीटर से अधिक पानी का संचयन संभव हो पाया है, जिससे क्षेत्र में जल उपलब्धता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
खेती में आया दोहरा लाभ
चेक डैम के निर्माण के बाद गांव के लगभग एक दर्जन परिवारों को दैनिक उपयोग के लिए पर्याप्त पानी मिलने लगा है। इसके साथ ही नौ किसानों के कुल पांच एकड़ खेतों में प्रत्यक्ष सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो गई है। समय पर सिंचाई होने से किसानों ने इस वर्ष बेहतर धान की फसल ली तथा पहली बार रबी सीजन में गेहूं और सरसों की खेती भी संभव हो सकी है। अब खेतों में हरियाली लहलहा रही है और किसानों को अतिरिक्त आमदनी की नई उम्मीद मिली है।
ग्राम पंचायत भगवानपुर के इस अर्दन चेकडेम से विशेष रूप से बैगा जनजाति के परिवारों को सीधा लाभ मिल रहा है। रामनरेश बैगा, श्रीमती ललिता बाई बैगा, रामसिंह बैगा, बृजमोहन सिंह बैगा, बृजलाल बैगा सहित अन्य किसानों के खेतों में अब खरीफ के बाद रबी की फसलें भी लहलहा रही हैं। अर्दन चेकडेम ने न केवल जल संकट का समाधान किया है, बल्कि वनांचल क्षेत्र के किसानों के जीवन में आत्मनिर्भरता और खुशहाली की मजबूत नींव भी रखी है।