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महतारी वंदन योजना : आर्थिक संबल से आत्मनिर्भरता तक महिलाओं के सशक्तिकरण की कहानी

by Bhupendra Sahu

रायपुर छत्तीसगढ़ में महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता, आत्मसम्मान और समाज में उनकी निर्णायक भूमिका को सुदृढ़ करने की दिशा में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रारंभ की गई महतारी वंदन योजना आज महिला सशक्तिकरण की एक प्रभावी और दूरगामी पहल के रूप में उभर रही है। यह योजना न केवल महिलाओं को नियमित आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाते हुए स्वरोजगार और आजीविका के नए अवसरों से भी जोड़ रही है।

आर्थिक संबल से आत्मनिर्भरता तक महिलाओं के सशक्तिकरण की कहानी

योजना के अंतर्गत पात्र महिलाओं को प्रतिमाह 1,000 रुपये की निश्चित सहायता राशि सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित की जा रही है। अब तक राज्य की लाखों महिलाओं को 23 किश्तों में कुल 14,948 करोड़ 34 लाख रुपये की राशि प्रदान की जा चुकी है। इस नियमित सहयोग से महिलाओं की घरेलू खर्चों की चिंता कम हुई है, आत्मविश्वास बढ़ा है और वे आर्थिक निर्णयों में सक्रिय भूमिका निभाने लगी हैं।
स्वरोजगार की ओर बढ़ते कदम

महतारी वंदन योजना का सबसे सकारात्मक पहलू यह है कि महिलाएं इस सहायता राशि का सदुपयोग कर छोटे-छोटे व्यवसाय प्रारंभ कर रही हैं। जांजगीर-चांपा जिले के चांपा नगर के वार्ड क्रमांक 02 की निवासी श्रीमती उर्मिला यादव ने हर माह मिलने वाली राशि को बचाकर आर्टिफिशियल गहनों का व्यवसाय शुरू किया। आज वे घर से तथा साप्ताहिक हाट-बाजारों में गहनों का विक्रय कर प्रतिमाह लगभग 2,000 रुपये की अतिरिक्त आमदनी अर्जित कर रही हैं।

इसी तरह चांपा की श्रीमती ज्योति कसेर ने योजना की सहायता से पापड़ व्यवसाय प्रारंभ किया, जिससे उन्हें प्रतिमाह लगभग 5,000 रुपये का लाभ हो रहा है। इससे वे अपने परिवार की शिक्षा और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को सहजता से पूरा कर पा रही हैं। ग्राम सरहर की श्रीमती सुमित्रा कर्ष ने श्रृंगार सामग्री की दुकान शुरू कर लगभग 1,000 रुपये प्रतिमाह की अतिरिक्त आय अर्जित की, जबकि श्रीमती कुसुम देवी पाण्डेय ने अपनी श्रृंगार दुकान का विस्तार कर अब हर महीने 2,000 रुपये का मुनाफा प्राप्त कर रही हैं।

गरीब परिवारों के जीवन में स्थायित्व
यह योजना मजदूरी और सीमित आय पर निर्भर परिवारों के लिए भी आर्थिक सुरक्षा का आधार बन रही है। कबीरधाम जिले के ग्राम मझगांव की निवासी श्रीमती सतरूपा गंधर्व, जो मजदूरी पर निर्भर परिवार से हैं, को अब तक योजना के तहत 23 किश्तों में 23,000 रुपये प्राप्त हो चुके हैं। वे बताती हैं कि इस राशि से बच्चों की पढ़ाई, घरेलू जरूरतें और व्यक्तिगत

आवश्यकताएं आसानी से पूरी हो पा रही हैं। नियमित सहायता से अब वे कुछ बचत भी कर पा रही हैं, जिससे आकस्मिक खर्चों की चिंता समाप्त हो गई है।बलरामपुर जिले के ग्राम रघुनाथनगर की साधारण किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाली श्रीमती ओमलता भी इस योजना से लाभान्वित होकर स्वावलंबन की दिशा में आगे बढ़ी हैं।

महिलाओं के सम्मान और भागीदारी में वृद्धि
महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि महतारी वंदन योजना महिलाओं के जीवन में स्थायित्व, सम्मान और आत्मविश्वास लाने वाली पहल है। नियमित आर्थिक सहायता से महिलाएं परिवार की आवश्यकताओं में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं और आर्थिक निर्णयों में उनकी भागीदारी बढ़ी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि योजना का लाभ प्रत्येक पात्र महिला तक समयबद्ध और पारदर्शी ढंग से सुनिश्चित किया जाए।

महतारी वंदन योजना आज केवल एक आर्थिक सहायता कार्यक्रम नहीं, बल्कि महिलाओं के सपनों, आत्मनिर्भरता और सामाजिक सशक्तिकरण की मजबूत आधारशिला बन चुकी है। यह योजना प्रदेश की महिलाओं को आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का अवसर दे रही है और छत्तीसगढ़ को महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में एक नई पहचान दिला रही है।

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