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अब गंभीर आरोपों पर छोडऩी होगी प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को कुर्सी

by Bhupendra Sahu

0-केंद्र सरकार लाएगी विधेयक
नईदिल्ली,। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार एक ऐसा विधेयक लाने जा रही है, जिससे गंभीर आरोपों पर प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को कुर्सी छोडऩी पड़ेगी।
रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार इस विधेयक को बुधवार को लोकसभा में पेश करेगी। विधेयक में प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों, जम्मू-कश्मीर सहित केंद्र शासित प्रदेशों के मंत्रियों को पद से हटाने के लिए कानूनी ढांचा प्रदान किया जाएगा। इसके अलावा गंभीर आपराधिक आरोपों में उन्हें गिरफ्तार या हिरासत में भी लिया जा सकता है।
विधेयक में प्रस्तावित प्रावधानों के अनुसार अगर कोई मंत्री किसी गंभीर अपराध (5 वर्ष या उससे अधिक की सजा वाले अपराध) के आरोप में लगातार 30 दिन जेल में रहता है, तो राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सलाह पर उसे पद से हटा देंगे। इस मामले में अगर प्रधानमंत्री सलाह नहीं देते तो मंत्री 31वें दिन के बाद स्वत: ही पद से हट जाएंगे। कोई राज्य मंत्री 30 दिनों तक जेल में रहा, तो राज्यपाल उन्हें मुख्यमंत्री की सलाह से हटाएंगे।
अगर राज्य के मंत्री को हटाने की सलाह मुख्यमंत्री नहीं देंगे तो 31वें दिन मंत्री का पद स्वत: समाप्त हो जाएगा। अगर मुख्यमंत्री खुद 30 दिन तक जेल में रहे तो उन्हें 31वें दिन तक इस्तीफा देना होगा, अन्यथा उनका भी पद समाप्त होगा। इसी तरह, प्रधानमंत्री अगर खुद ऐसे गंभीर आरोपों में 30 दिनों तक जेल में रहें, तो उन्हें भी 31वें दिन तक इस्तीफा देना होगा, अन्यथा उनका पद खुद से समाप्त हो जाएगा।
विधेयक के प्रस्तावित प्रावधान के मुताबिक अगर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या किसी राज्य मंत्री सहित कोई भी मंत्री को गंभीर अपराध (5 वर्ष या उससे अधिक के कारावास) में गिरफ्तार या 30 दिनों की निरंतर अवधि के लिए हिरासत में रखा जाता है, उसे पद से हटाया जा सकेगा। प्रस्तावित विधेयक संविधान के अनुच्छेद 75, 164 और 239एए के साथ जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 की धारा 54 में संशोधन करने का प्रयास करता है और इसमें नया खंड (4ए) जोड़ता है।
नए खंड के अनुसार, अगर किसी मंत्री को उसके कार्यकाल के दौरान लगातार 30 दिनों तक गिरफ्तार करके हिरासत में रखा जाएगा, तो उसे उपराज्यपाल द्वारा मुख्यमंत्री की सलाह पर 31वें दिन तक हटा दिया जाएगा। सलाह न देने पर खुद ही पद समाप्त होगा।
प्रस्तावित विधेयक संवैधानिक नैतिकता की रक्षा करने और निर्वाचित प्रतिनिधियों में जनता का विश्वास सुनिश्चित करने पर प्रकाश डालता है। विधेयक के अनुसार, निर्वाचित नेता लोगों की आशाओं और आकांक्षाओं के प्रतीक होते हैं, ऐसे में संविधान में अभी कोई प्रावधान नहीं है, जिससे किसी वर्तमान प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री को हटाया जा सके और गंभीर आरोपों में गिरफ्तार किया जा सके। पद पर आसीन मंत्रियों का चरित्र और आचरण किसी भी संदेह से अलग होना चाहिए।
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