बीजापुर । जिला प्रशासन बीजापुर द्वारा माओवादी भय के तिलस्म को तोड़कर भविष्य की नई इबारत लिखने की मुहिम को अमली जामा पहनाने का प्रयास कर रहा है । खास मौका था जश्ने आजादी का कार्यक्रम और 11 गांव के शाला त्यागी और अप्रवेशी बच्चों की मौजूदगी। ये बच्चे सामान्य परिवेश नहीं बल्कि उस इलाके से आए थे जहां सरकारी नुमाइंदों और दीगर लोगों के लिए कदम रख पाना नामुमकिन होता है। बीजापुर ब्लॉक के एड्समेटा, करका, कोरचोली, तोड़का, सावनार, नेनड्रा, इतावर, उसूर ब्लॉक के भट्टीगुड़ा कोंडापल्ली, भोपालपटनम के अन्नाराम और भैरमगढ़ के कोतरापाल में वेंडे स्कूल दायकाल अभियान के तहत 20 सालों से बंद स्कूलों का इस साल पुनः संचालन किया गया।
छत्तीसगढ़ सरकार के शांति विकास और सुरक्षा अभियान के तहत नियद नेल्लानार क्षेत्र को विकसित करने की मुहिम से 16 स्कूलों को फिर से संचालित किया गया। इन इलाकों में ज्यादातर स्थानों पर स्कूल खोलना एक बड़ी चुनौती मानी जाती है लेकिन जिला प्रशासन के दृढ़ संकल्प ने इसे आसान बना दिया। वेंडे स्कूल दायकाल अंतर्गत इन दुर्गम और हिंसा ग्रस्त इलाकों का सर्वे करने के पश्चात स्कूल खोलने की कवायद की गई और इस शिक्षा सत्र में इसे संचालित करने में जिला प्रशासन को बड़ी कामयाबी मिली ।
स्कूल खोलने के बाद एक बड़ी चुनौती इन इलाके के बच्चों को बेहतर शिक्षा के साथ बेहतर दिशा देने की रही जिसके फलस्वरूप कलेक्टर ने इन बच्चों के साथ लंच विथ कलेक्टर का आयोजन किया और इस दौरान उनकी परिस्थितियों और मनोभावों को समझा। लंच के दौरान बच्चों ने बातों बातों में कलेक्टर से अपने मन की बात कही। करका गांव की लक्ष्मी और अनन्या ने कहा कि डाक्टर और मैडम बनने के लिए कितना पढ़ना है। कलेक्टर ने दोनों बच्चों को प्राथमिक से हायर सेकेंडरी तक की पढ़ाई में नियमित स्कूल जाकर मेहनत करने और नीट और बीएड जैसे पाठ्यक्रम को लक्ष्य बनाकर पढ़ने हेतु प्रोत्साहित किया।