नई दिल्ली । आरबीआई ने इस साल रेपो रेट में 100 बेसिस प्वाइंट की कटौती की है, जिस वजह से ये अटकलें लगाई जा रही हैं कि जुलाई में होने वाली अगली समीक्षा में पब्लिक प्रोविडेंट फंड की ब्याज दर 7प्रतिशत से नीचे जा सकती है।
कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकारी बॉन्ड की गिरती यील्ड और ब्याज दर तय करने के फार्मूले इस कटौती की ओर इशारा कर रहे हैं, वहीं कुछ का मानना है कि राजनीतिक और व्यवहारिक कारणों से सरकार इतनी जल्दी कोई बड़ा फैसला नहीं लेगी। अभी आरबीआई की ब्याज दर 7.10त्न है, जो कि 10 साल के सरकारी बॉन्ड की औसत यील्ड से जुड़ी होती है। श्यामला गोपीनाथ कमेटी के फार्मूले के अनुसार, आरबीआई की ब्याज दरें 10 साल के सरकारी बॉन्ड की औसत यील्ड से 25 बेसिस प्वाइंट ज्यादा होनी चाहिए। अभी यह यील्ड करीब 6.325त्न पर है, जिससे हिसाब लगाकर आरबीआई की दर लगभग 6.575त्न बनती है यानी मौजूदा दर से करीब 52.5 बेसिस प्वाइंट कम है।
इस ब्याज दर में कटौती की चर्चा आरबीआई की मौद्रिक नीति में नरम रुख के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है। इस साल क्रक्चढ्ढ ने फरवरी और अप्रैल में 25-25 बेसिस प्वाइंट और जून में 50 बेसिस प्वाइंट की कटौती की है, जिससे रेपो रेट 6.5त्न से घटकर 5.5त्न हो गया है। इसी के साथ 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड भी जनवरी में 6.779त्न से घटकर जून में 6.247त्न हो गई है। हालांकि, सभी लोग यह नहीं मानते कि सरकार क्कक्कस्न की ब्याज दरों में तुरंत कटौती करेगी।
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