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महिला सशक्तिकरण आर्ट ऑफ लिविंग का एक अहम उद्देश्य: श्री श्री रविशंकर

by Bhupendra Sahu

बेंगलुरु । झारखंड के धनबाद में शुक्रवार से शुरू हो रहे 10वें अंतरराष्ट्रीय महिला सम्मेलन से पहले आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर ने कहा कि महिला सशक्तिकरण पिछले 20 वर्षों से आर्ट ऑफ लिविंग का एक प्रमुख उद्देश्य रहा है। उन्होंने बताया कि इस दिशा में आर्ट ऑफ लिविंग से जुड़े विभिन्न ट्रस्ट लगातार प्रयास कर रहे हैं और पूरे देश में 1,200 से अधिक नि:शुल्क स्कूल चला रहे हैं, जहां हजारों बच्चे शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।
इस अंतरराष्ट्रीय महिला सम्मेलन में 60 से अधिक वक्ता और 500 से अधिक प्रतिनिधि भाग लेंगे। इसमें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू समेत राजनीति, व्यापार, कला और समाज सेवा से जुड़े कई दिग्गज शामिल होंगे। श्री श्री रविशंकर ने कहा कि यह सम्मेलन हर दो साल में आयोजित किया जाता है और इसका उद्देश्य महिलाओं को प्रेरित करना, उनके मुद्दों पर चर्चा करना और उन्हें सशक्त बनाना है। उन्होंने बताया कि यहां अलग-अलग देशों से आई महिलाएं अपने अनुभव, सफलताएं और चुनौतियां साझा करेंगी, जिससे नई परियोजनाओं और योजनाओं को आकार दिया जा सके।
उन्होंने कहा कि यह मंच महिलाओं को उनके अधिकारों, संभावनाओं और उपलब्धियों के बारे में चर्चा करने का अवसर देता है। इस सम्मेलन में ग्रामीण और शहरी महिलाओं के बीच मौजूद असमानताओं को कम करने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। श्री श्री रविशंकर ने बताया कि आर्ट ऑफ लिविंग महिला सशक्तिकरण के लिए विभिन्न परियोजनाएं चला रहा है, जिनमें शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और खेल से जुड़े कार्यक्रम शामिल हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं की भागीदारी कृषि क्षेत्र में भी बढ़ रही है और इस पर भी चर्चा की जाएगी।

उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन में महिलाओं को ओलंपिक और अन्य खेल प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए प्रेरित करने पर भी विचार किया जाएगा। आर्ट ऑफ लिविंग की इस पहल के तहत महिलाओं को स्थानीय स्तर पर संगठनों और गैर सरकारी संस्थाओं के सहयोग से विभिन्न अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। यह मंच महिलाओं को उनके भविष्य की योजनाओं और सामूहिक विकास पर विचार करने का अवसर प्रदान करता है।
श्री श्री रविशंकर ने बताया कि भारत में यह 10वां अंतरराष्ट्रीय महिला सम्मेलन है और हर बार इसमें भाग लेने वाले लोगों की संख्या बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि महिलाओं की भागीदारी सिर्फ घरेलू स्तर तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उन्हें नेतृत्व की भूमिका निभाने के लिए आगे आना होगा। उन्होंने इस सम्मेलन को महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल बताया, जो महिलाओं को एकजुट कर उनके अधिकारों और अवसरों पर चर्चा करने का मंच प्रदान करता है।
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